हार्वर्ड स्टडी का खुलासा: क्या AI डॉक्टरों से बेहतर हो रहा है?

अमेरिका के हारवर्ड युनिवर्सिटी से आई एक नई स्टडी ने मेडिकल दुनिया में हलचल मचा दी है. क्या अब डॉक्टर से पहले AI पर भरोसा करना पड़ेगा?

हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की इस स्टडी में जो सामने आया, वह चौंकाने वाला है. रिसर्च के दौरान इमरजेंसी रूम के असली मरीजों के डेटा पर AI और डॉक्टरों को एक ही केस दिए गए.

नतीजा यह रहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI ने करीब 67 प्रतिशत मामलों में सही या करीब-करीब सही डायग्नोसिस दिया, जबकि डॉक्टरों की सटीकता 50 से 55 प्रतिशत के बीच रही.

इमरजेंसी रूम में डॉक्टर्स से सटीक AI!
आपको बता दें कि इस स्टडी में इस्तेमाल किया गया AI कोई आम चैटबॉट नहीं था, बल्कि एडवांस्ड रीजनिंग मॉडल था, जो स्टेप-बाय-स्टेप सोचकर फैसला लेने की कोशिश करता है. यही वजह है कि जटिल मेडिकल केस में उसने बेहतर परफॉर्म किया.

ये भी पढ़ें :  भारत में जल्द लॉन्च होगा Oppo Find X8 Ultra

इमरजेंसी रूम जैसे हाई-प्रेशर माहौल में जहां हर सेकंड की कीमत होती है, वहां सही डायग्नोसिस ही सबसे बड़ा गेमचेंजर होता है. और यही जगह है जहां AI ने अपनी ताकत दिखाई, तेजी से डेटा पढ़ना, पैटर्न पकड़ना और बिना थके लगातार एनालिसिस करना.

लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि डॉक्टर अब पीछे छूट जाएंगे? जवाब है.. नहीं.

अब भी मशीनी है AI की अप्रोच
इस स्टडी के साथ ही एक्सपर्ट्स ने एक बड़ा ‘कैच’ भी बताया है. AI ने जो फैसले लिए, वो सिर्फ लिखित डेटा के आधार पर थे. यानी मरीज का चेहरा, उसकी तकलीफ, उसकी घबराहट, ये सब AI समझ ही नहीं सकता.

ये भी पढ़ें :  उत्तर में खरमास का विराम, दक्षिण में परंपराओं की निरंतरता: क्या है अलग रिवाज?

डॉक्टर सिर्फ रिपोर्ट नहीं पढ़ता, वह इंसान को पढ़ता है. यही फर्क अभी भी मशीन और इंसान के बीच सबसे बड़ा गैप है. दरअसल, रिसर्च से जो सबसे दिलचस्प बात निकलकर आई, वह यह है कि फ्यूचर डॉक्टर बनाम AI का नहीं, बल्कि डॉक्टर + AI का होगा. इसे एक्सपर्ट्स ट्रायडिक केयर मॉडल कह रहे हैं, जहां डॉक्टर, मरीज और AI तीनों मिलकर फैसला लेंगे.

डॉक्टर्स भी AI पर डिपेंडेंट?
इस स्टडी का एक और पहलू भी है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. अगर डॉक्टर AI पर ज्यादा निर्भर होने लगते हैं, तो क्या उनकी अपनी फैसला लेने क्षमता कमजोर हो जाएगी? क्या हर केस में मशीन की सलाह को प्राथमिकता मिलेगी? ये सवाल अब मेडिकल सिस्टम के सामने खड़े हो रहे हैं.

ये भी पढ़ें :  Iran War Impact: 'अगर युद्ध 40 दिन से ज्यादा चला, तो...' इकोनॉमिस्ट ने दी चेतावनी, खाद्य कीमतें 6 महीने के उच्चतम स्तर पर

दूसरी तरफ, हेल्थकेयर इंडस्ट्री में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. अमेरिका में लगभग हर पांच में से एक डॉक्टर किसी न किसी रूप में AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहा है.

लेकिन खतरे भी कम नहीं हैं. अगर AI गलत डायग्नोसिस देता है तो जिम्मेदारी किसकी होगी? डॉक्टर की, अस्पताल की या उस कंपनी की जिसने AI बनाया? और सबसे बड़ा सवाल, क्या मरीज मशीन पर उतना भरोसा कर पाएगा, जितना इंसान पर करता है?

हार्वर्ड की यह स्टडी इन सवालों के जवाब नहीं देती, लेकिन एक नई बहस जरूर शुरू कर देती है. यह दिखाती है कि AI अब सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं रहा, बल्कि हेल्थकेयर जैसे संवेदनशील सेक्टर में एंट्री कर चुका है.

Share

क्लिक करके इन्हें भी पढ़ें

Leave a Comment